ज्वार भाटा किसे कहते हैं? (Jwar Bhata Kise Kahate Hain)

आपने ज्वार भाटा का नाम तो सुना ही होगा आखिर क्या है ये ज्वार भाटा ?

आज इस पोस्ट में आपको ज्वार भाटा किसे कहते हैं? (Jwar Bhata Kise Kahate Hain), ज्वार भाटा आने का कारण, ज्वार भाटा के प्रकार, तथा ज्वार भाटा आने से मानव जीवन किस प्रकार प्रभावित होता है, आदि के बारे में विस्तार से जानने को मिलने वाला है |

Jwar Bhata Kise Kahate Hain

ज्वार भाटा किसे कहते हैं? (Jwar Bhata Kise Kahate Hain)

ज्वार भाटा दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है – ज्वार व भाटा | ज्वार को अँग्रेजी में टाइड (Tide) तथा भाटा को अँग्रेजी में इब (Ebb) कहा जाता है |

सौरमंडल में पृथ्वी, सूर्य, तथा चन्द्रमाँ का अपना खुद का गुरुत्वाकर्षण होता है | तथा पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमते हुए सूर्य के चारों और चक्कर लगती रहती है | उसी प्रकार चंद्रमा भी पृथ्वी के चारों और चक्कर लगाता रहता है |

इस स्थिति में चंद्रमा कई बार पृथ्वी के नजदीक आ जाता है जिसकी वजह से चंद्रमा अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति (बल) के द्वारा पृथ्वी को अपनी और खींचता है |

चूंकि पृथ्वी का ठोस भाग पर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल का अधिक प्रभाव नहीं पड़ता है परंतु पृथ्वी का तरल भाग जैसे महासागर, सागर, खाड़ी, एवं समुद्र आदि पर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल से प्रभवित होता है जिसकी वजह से समुद्र के पानी में हलचल हो जाती है |

इस परिस्थिति में समुद्र का पानी कभी ऊपर उठता है और कभी वापस नीचे गिरता है जिसे ज्वार भाटा कहते है |

समुद्र में पानी का सामान्य तल से ऊपर उठना ज्वार कहलाता है तथा सामान्य तल से पानी का नीचे गिरना भाटा कहलाता है |

अत: चंद्रमा और सूर्य की गुरुत्वाकर्षण बल व पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की आपस में क्रियाशीलता की वजह से पृथ्वी के समुद्री जल का अपने तल से ऊपर उठना और पुन: नीचे गिरना ज्वार भाटा कहलाता है |

ज्वार भाटा का प्रभाव समुद्र, खाड़ी, महासागरों व सागरों पर ही प्रभावी होता है | इसमें से समुद्रों व खाड़ियों में ऊंचे ऊंचे ज्वार उठते है जबकि सागरों में कम ऊंचे ज्वार उठते है |

पृथ्वी पर पायी जाने वाली नदियों, तालाबों, झीलों आदि में ज्वार भाटा नहीं आता है क्योंकि समुद्र व सागर में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है तथा पानी दूर-दूर तक फेला हुआ होता है |

जैसा कि गुरुत्वाकर्षण बल किसी वस्तु की मात्रा के समानुपाती होता है तथा दूरी के वर्ग के प्रतिलोमानुपाती होता है | अत: समुद्र व सागर में पानी की मात्रा बहुत अधिक होने के कारण यह चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति से ज्यादा प्रभावित होता है |

पृथ्वी पर समुद्र में ज्वारभाटा आने का मुख्य कारण चंद्रमा होता है न की सूर्य | हालांकि चंद्रमा, सूर्य व पृथ्वी तीनों की गुरुत्वाकर्षण शक्ति में अंतक्रिया के कारण ज्वारभाटा आता है परंतु इसमें चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति अधिक प्रभावशाली होती है क्योंकि सूर्य पृथ्वी से अधिक दूर होता है परंतु चंद्रमा पृथ्वी के नजदीक होता है |

समान्यतया दिन में दो बार समुद्र का पानी एक निश्चित समय अंतराल पर पर ऊपर उठता है और नीचे गिरता है | यह उतार चढ़ाव 7 से 10 मीटर तक हो सकते है |

ज्वार भाटा की उत्तप्ति का मुख्य कारण गुरुत्वाकर्षण की शक्ति होती है | जिसमें पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति, सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्ति तथा चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति तीनों सम्मिलित रूप से जिम्मेदार होती है |

एक दिन में दो बार ज्वारभाटा आता है जिसके मध्य का समय 12 घंटे 26 मिनट होता है |

ज्वार भाटा के प्रकार

ज्वार भाटा दो प्रकार के होते है जो कि निम्नलिखित है-

  1. उच्च ज्वार
  2. निम्न ज्वार

उच्च ज्वार व निम्न ज्वार सूर्य, चंद्रमा एंव पृथ्वी की आपस में स्थिति पर निर्भर करता है |

जब अमावस्या और पूर्णिमा का दिन होता है तब चन्द्रमा, सूर्य एवं पृथ्वी तीनों एक सीध में होते हैं | इस स्थिति में चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल से समुद्र में आपने वाला ज्वार उच्च ज्वार कहलाता है |

इसी प्रकार जब सप्तमी या अष्टमी के दिन सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा समकोण की स्थिति में होते है तो ऐसी स्थिति में पृथ्वी के समुद्र में आने वाले ज्वार को निम्न ज्वार कहते है |

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ज्वार भाटा का मानव जीवन पर प्रभाव

ज्वार भाटा आने पर समुद्र के किनारे स्थित शहरों व नगरों में निवास करने वाले लोगों का जीवन प्रभावित होता है |

आस पास के इलाकों में पानी भर जाता है और कभी कभार तो बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है | जिसके कारण सामान्य जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है |

समुद्र में ज्वार भाटा आने पर पानी के जहाज को डूबने का खतरा रहता है |

ज्वार भाटा की आने के बाद मछलियाँ, शंख, मूंगा, मोती आदि समुद्री किनारों के तट पर आ जाते है जिसे मनुष्य बेचकर अपना जीवन यापन करते है |

ज्वरीय ऊर्जा के द्वारा विद्यूत केंद्र बनाए जाते है जिसके द्वारा विद्युत ऊर्जा बनाई जाती है |

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ज्वार भाटा से संबन्धित पूछे जाने वाले प्रश्न व उत्तर

ज्वार भाटा का क्या मतलब है?

पृथ्वी, सूर्य एवं चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति की आपस में अंतक्रिया की वजह से समुद्र में पानी का ऊपर उठना व वापस नीचे गिरना ज्वार भाटा कहलाता है |

24 घंटे में ज्वार भाटा कितनी बार आता है?

24 घंटे में ज्वार भाटा दो बार आता है जिसमे मध्य 12 घंटे 26 मिनट का अंतराल होता है |

भाटा कितने प्रकार के होते है?

ज्वार भाटा दो प्रकार के होते है +
1. उच्च ज्वार
2. निम्न ज्वार

ज्वार भाटा कब आता है?

जब चंद्रमा पृथ्वी के नजदिक आता है तब दोनों की गुरुत्वाकर्षण शक्ति में अंतक्रिया के कारण समुद्र का पानी अपने तल से ऊपर उठता है तथा नीचे गिरता है | इस स्थिति को ज्वार भाटा कहते है |

विश्व का सबसे बड़ा ज्वार भाटा कौनसा है?

विश्व का सबसे बड़ा ज्वार भाटा कनाडा के नोवा स्कोटिया में स्थित फंडी की खाड़ी में आता है |

पृथ्वी का सबसे ऊंचा ज्वार कहाँ आता है?

पृथ्वी का सबसे ऊंचा ज्वार कनाडा के नोवा स्कोटिया में स्थित फंडी की खाड़ी में आता है |

पृथ्वी का सबसे छोटा ज्वार कहाँ आता है?

गुजरात के ओखा तट पर पृथ्वी का सबसे छोटा ज्वार आता है |

अंतिम दो शब्द

आज आपने इस पोस्ट में ज्वार भाटा किसे कहते हैं? (Jwar Bhata Kise Kahate Hain), ज्वार भाटा क्यों आता है आदि के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की है |

इस पोस्ट को पढ़कर आप ज्वारभाटा के बारे में काफी सीख गए होंगे | आपको यह पोस्ट कैसी लगी | कमेन्ट करके जरूर बताए |

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